Tuesday, August 21, 2018

एक पाती मेरे 'नाराज़' ईश्वर के नाम... ज़िन्दगी की पूर्णाहुति हो जाये, पर हमसे आपकी नाराज़गी का कोटा कभी पूरा ही नहीं होता, ज़रा लकीर से हटें और आप के नाराज़ होने का सिलसिला शुरू। कहने को भोले हो, पर 19-20 की उमर में अगर हम आपके मंदिर का फेरा ना लगाएं तो आप नाराज़, हमारे लिए reserved रखे मिस्टर परफेक्ट के फेरे किसी और कन्या के साथ पड़वा दो। इसके बाद खुदा ना खास्ता हमें एकाध मिस्टर परफेक्ट प्रसाद में दे भी दो और फिर हम उसकी लम्बी उम्र के लिए व्रत त्योहार ना करें, चूड़ी-बिंदी ना करें, तो फिर आप नाराज़। बुड्ढे होने पर ना बनते हुए भी एकादशी-पूर्णिमा ना रखें, तो आप अगला जन्म भी ना सुधारो हमारा, फिर वही रूप, स्त्री का... कभी कभी लगता है, आप इत्ती इत्ती सी बातों पे हमसे नाराज़ हो जाते हो, ये शायद आपको भी नहीं पता होगा, आपको तो ये भी नहीं पता होगा कि हमारी मेमोरी में क्या क्या फीड कर देती है आपकी ये दुनिया आपके ही नाम से, 16 सोमवार ना किये तो हाथ धो बैठेंगी हम सर्वगुणसम्पन्न पति से, आपने ज़रूरी कर रखी है हमारे लिए साल की चार चौथ और आठ ग्यारसें और ना जाने क्या क्या... वैसे सच कहूं, कभी यकीन नहीं होता, आप लगते भी तो नहीं हो ऐसे, ज़रा ज़रा में रूठने वाले, हर सुबह जब सिकती हुई रोटी और चढ़ी हुई कढ़ाई के साथ ही मन ही मन बुदबुदा लेते हैं हम एकाध बार हनुमान चालीसा आपकी पूजा के नाम पर या आये दिन शर्मिंदा होते हैं अपनी जवाबदेहियों के बीच बस आपका ही काम छोड़ने पर। इतिहास गवाह है, पुरुषों की तरह मोक्ष के नाम पर कभी किसी स्त्री ने नहीं छोड़ा अपना घर और ज़िम्मेदारियाँ, पर आप तो तब भी नाराज़ नहीं होते हम पर, उल्टे जिस रूप में हम बुलाएं, दौड़े आते हो एक आवाज़ पर कभी द्रौपदी का आँचल बनके और कभी शबरी के राम बनके... ....अब हमें पता चला है कि आप फिर हम से नाराज़ हैं और इसीलिए अभूतपूर्व आपदा झेल रही है आपकी अपनी भूमि "केरल", आप नाराज़ हैं हमसे क्यूंकि आपके घर 'सबरीमाला' में प्रविष्ट हो गए हम, आपको मंजूर नहीं था हमारा वहां प्रवेश...!!! ना जाने क्यूं, पर मुझे विश्वास है कि आपको तो पता भी नहीं होगी आपदा के पीछे ये आपकी नाराज़गी वाली थ्योरी... मेरे अपने ईश्वर, अब बस इतना सा हम आधी आबादी के लिए कर दीजिए। आप जता दीजिए उन्हें कि ये संकट आम आदमी के जीवन पर आया है तो उसका बड़ा कारण माँ प्रकृति के साथ उनका अपना घटिया व्यवहार है। प्रकृति स्त्रैण है, माँ है, सबका लालन पालन करती है। उसके ममत्व और स्नेह में हम सारे इतराते हैं। हाँ, पर जब-जब इससे छेड़छाड़ होती है तो वह नहीं बख्शती। ये स्त्री होने की ताकत भी है... सावधान!!!! #केरल #सबरीमाला -garima